आजकल मोबाइल में एक चलन बहुत चल रहा है वो है अपने नाम की रिंगटोन का चलन अपने नाम की रिंगटोन बनाने के लिए सॉफ्टवेयर के द्वारा थोड़ी बहुत मेहनत करनी पड़ती है लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग कम टाइम में और बिना मेहनत के ही हर चीज हासिल करना चाहते है आज मैं आपको एक ऐसी ही साइट पर लेकर चल रहा हु जहां आपको बहुत ही कम टाइम में बिना मेहनत के ही आपको आपके नाम की रिंगटोन मिल जायेगी जिस साइट का लिंक में आपको दे रहा हु उस साइट से आप मुफ्त में अपने नाम की रिंगटोन डाउनलोड करके अपने मोबाइल में सेट कर सकते हो अगर आप खुद ही अपने नाम की रिंगटोन बनाना चाहते हो तो इसके लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी अगर बिना मेहनत के और बिना टाइम बर्बाद किये अपने नाम की रिंगटोन डाउनलोड करना चाहते हो तो यहाँ क्लिक करके उस बेहतरीन साइट पर जाओ और अपना नाम सर्च करके अपने नाम की रिंग टन डाउनलोड करो और उसे अपने मोबाइल में सेट करो.
भाषा भाषा अपने मन के भावों तथा विचारों को बोलकर, लिखकर या पढ़कर प्रकट करने का माध्यम है। भाषा के प्रकार :- भाषा मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं; ये निम्नलिखित हैं - (क) मौखिक भाषा (ख) लिखित भाषा ( क ) मौखिक भाषा :- जब हम अपने भावों तथा विचारों को बोलकर प्रकट करते हैं, तो उसे मौखिक भाषा कहते हैं; जैसे - फिल्में, गाने आदि। ( ख ) लिखित भाषा :- भाषा का वह रूप जिसमें लिखकर या पढ़कर विचारों को प्रकट किया जाए, उसे लिखित भाषा कहते हैं; जैसे - पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएँ, अखबार आदि लिखित भाषा के उदाहरण हैं। सांकेतिक भाषा :- कभी-कभी हम संकेत के माध्यम से भी अपने भावों को प्रकट करते हैं; जैसे - मुँह पर अंगुली रखने का अर्थ चुप रहना होता है, चौराहे पर ट्रैफिक हवलदार द्वारा दिए गए संकेत। इस प्रकार की भाषा को सांकेतिक भाषा कहते हैं। परंतु संकेतों द्वारा हर भाव या विचार को प्रकट नहीं किया जा सकता। इसलिए इस प्रकार की भाषा को महत्व नहीं दिया जाता। हिन्दी भाषा का उद्भव एव...
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