Skip to main content

शब्द vichar

शब्द


जिस तरह सब्जी पकाने के लिए घी/तेल, नमक, मिर्च, धनिया, हल्दी, टमाटर, पानी व खाद्य (खाने का) पदार्थ जैसे आलू व कोई भी सब्जी की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार विचार-विनिमय के लिए भाषा की आवश्यकता होती है, उस भाषा का निर्माण शब्दों से होता है। यदि शब्द न हो तो भाषा का कोई अस्तित्व नहीं होता है।

बोलते समय हमारे मुँह से ध्वनियाँ निकलती है। वह प्रत्येक ध्वनि एक वर्ण को इंगित करती है। इन सब ध्वनियों से मिलकर शब्द बनते हैं और इन्हीं वर्णों का समूह, शब्द कहलाता है। शब्द में प्रत्येक वर्ण का एक निश्चित स्थान होता है यदि निश्चित स्थान पर वर्णों को न रखा जाए तो उन्हें शब्दों का नाम नहीं दिया जा सकता। उसके लिए इसे उचित स्थान पर रखा जाना बहुत आवश्यक है; जैसे - नवप शब्द लिखा जाए तो इससे किसी सही शब्द का निर्माण नहीं होगा परन्तु अब इसमें फेरबदल कर दिया जाए तो यह पवन शब्द बनाता है। इसी तरह से अन्य सभी शब्दों का निर्माण होता है। इसलिए हम कह सकते हैं एक या अधिक वर्णों से बनी हुई स्वतंत्र सार्थक ध्वनि, शब्द कहलाता है।

अन्य परिभाषा :- वर्णों के सार्थक समूह ही शब्द कहलाता है।

उदाहरण -

क् + अ + म् + अ + ल् + अ = कमल

                                   कमल - फूल का नाम

शब्द और पद्य

वर्णों के द्वारा शब्दों का निर्माण होता है। हर शब्द का अपना एक अर्थ होता है जब हम इन सभी शब्दों को आपस में जोड़कर लिखते हैं, तो इसे वाक्य कहा जाता है। इसमें हम व्याकरण सम्बन्धी सभी नियमों का ध्यान रखते हैं। अपने मनोभावों व विचारों को दूसरों को व्यक्त करने के लिए शब्दों को वाक्यों में एक सही जगह पर रखते हैं जिससे हम सही तरह से अपने मत को व्यक्त कर सकें। यदि हम इन शब्दों को वाक्यों में सही स्थान पर नहीं रख पाते तो पूरा वाक्य एक गलत अर्थ को दर्शाएगा जो स्थिति को गंभीर या हास्यापद बना सकता है; जैसे -

(1) इस नहा से साबुन लो।

इस साबुन से नहा लो।

(2) राम स्कूल देने परीक्षा गया है।

राम परीक्षा देने स्कूल गया है।

यहाँ शब्दों का स्थान बदल जाने पर कोई सार्थक अर्थ नहीं निकल पाया जिससे कोई लाभ नहीं होता और स्थिति गंभीर हो जाती है या हास्यापद बन जाती है। पर जब हम व्याकरण के नियमों का प्रयोग कर वाक्य निर्माण करते हैं तो वह पद कहलाते हैं।

शब्दों का वर्गीकरण - शब्दों की उत्पत्ति

हिंदी शब्द भंडार विश्व की अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत समृद्ध व बड़ा है। इसमें हिंदी के साथ-साथ देशी-विदेशी भाषाएँ भी शामिल हैं, इसमें अंग्रेज़ी, फ़ारसी, उर्दू, संस्कृत, तुर्की आदि अन्य भाषाओं के शब्द भी सम्मिलित हो गए हैं। वे इस प्रकार से हिंदी भाषा में घुलमिल गए हैं कि उनके बिना हमारी भाषा अधूरी जान पड़ती है। इन शब्दों के उत्पत्ति स्थल कौन से हैं, इनके क्या अर्थ हैं? इन सब प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए इन्हें वर्गों में विभाजित किया गया है। इनके वर्गीकरण के आधार निम्नलिखित हैं :-

(क) शब्दों की उत्पत्ति

(ख) रचना के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण

(ग) प्रयोग के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण

(घ) विकार के आधार पर शब्द भेद

(ङ) अर्थ के आधार पर शब्द भेद

शब्दों की उत्पत्ति :- हिंदी शब्द भंडार में अनेकों बाहरी भाषाओं के शब्दों का समावेश है ये शब्द कैसे आए इसको जानने के लिए हमें इनकी उत्पत्ति को जानना आवस्यक है इसकी उत्पत्ति को जानने के लिए चार स्रोत माने गए हैं; जो इस प्रकार है -

(क) तत्सम शब्द

(ख) तद्भव शब्द

(ग) देशज शब्द

(घ) विदेशी शब्द

(तत्सम शब्द :- तत्सम का अर्थ है तत् (उस) + सम (समान) उस संस्कृत के समान। तत्सम शब्द वे शब्द कहलाते हैं जो संस्कृत भाषा से लिए गए हैं व बिना किसी बदलाव के हिंदी भाषा में प्रयुक्त किए जा रहे हैं;

उदाहरण - नृत्य, अंधकार, अर्ध, छिद्र, छत्र, मयूर इत्यादि।

(तद्भव शब्द :- तद्भव का अर्थ है 'तत् (उससे) + भव (पैदा हुए) अर्थात् उस संस्कृत से पैदा हुआ शब्द। वे शब्द जो संस्कृत भाषा के शब्द से विकसित (पैदा हुए) हुए हैं, तद्भव शब्द कहलाते हैं।

क्षण

छिन

गर्दभ

गधा

ग्राम

गाँव

ग्राहक

गाहक

पृष्ठ

पीठ

प्रस्तर

पत्थर

पर्यंक

पलंग

आश्रय

आसरा

आश्चर्य

अचरज

उलूक

उल्लू

उष्ट्र

ऊँट

अट्टालिका

अटारी

चर्म

चाम

दुर्बल

दुबला

रत्न

रतन

लज्जा

लाज

उच्च

ऊँचा

भगिनी

बहन

सूत्र

सूत

मृत्यु

मौत

वधू

बहू

वाती

बात

दधि

दही

कूप

कुँआ

जिह्वा

जीभ

कुठार

कुल्हाड़ा

कर्ण

कान

धैर्य

धीरज

लक्ष

लाख

हस्ती

हाथी

शर्करा

शक्कर

भ्रातृ

भाई

(देशज :- देशज का अर्थ है - देश + ज अर्थात् देश में जन्म लेने वाले। जो शब्द क्षेत्रीय प्रभाव के कारण परिस्थिति व आवश्यकतानुसार बनकर प्रचलित हो गए हैं, वे देशज कहलाते हैं;

उदाहरण - लड़का, चिड़िया, डिबिया आदि।

(विदेशी या विदेशज :- भारत के इतिहास में विदेशी देशों का बड़ा साथ रहा है। कभी व्यापार की दृष्टि से तो कभी शासन की दृष्टि से हम सदा विदेशियों के संपर्क में बने रहें, उनकी भाषा के बहुत से शब्द स्वत: ही हिंदी भाषा में सम्मिलित (मिल) हो गए व आज वे प्रयुक्त होने लगे हैं, ऐसे शब्द विदेशी या विदेशज शब्द कहलाए। हमारी भाषा में अंग्रेज़ी, उर्दू, फ्रांसीसी, फ़ारसी, अरबी, चीनी आदि भाषाओं के अनेक शब्द मिल गए हैं -

(1) अंग्रेज़ी - कॉलेज, पैंसिल, टेलिविज़न, मशीन, टिकट, लैटरबाक्स, साईकिल इत्यादि।

(2) फारसी - चश्मा, ज़मींदार, दुकान, दरबार, बीमार, रुमाल, चुगलखोर, गंदगी, नमक।

(3) अरबी - औलाद, अमीर, कानून, ख़त, रिश्वत, मालिक, कैदी, आदि।

(4) चीनी - तूफान, चाय, पटाखा आदि।

(5) यूनानी - टेलिफ़ोन, ऐटम, डेल्टा आदि।

(6) तुर्की - कैंची, लाश, दरोगा, बहादुर आदि।

(7) पुर्तगाली - अचार, आलपीन, गमला, चाबी, कार, तिजोरी, फीता, काफी, कमीज़ आदि।

(8) जापानी - रिक्शा आदि।

रचना के आधार पर

वर्णों से मिलकर ही शब्दों का निर्माण होता है। वर्णों के मेल के आधार पर शब्दों के निम्नलिखित तीन भेद माने गए हैं -

• रुढ़ :- कुछ शब्द होते हैं जिनका खंड करने पर कोई अर्थ नहीं निकला हो या जो अन्य शब्दों के योग से नहीं बनते परन्तु फिर भी किसी विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं, वे रुढ़ कहलाते हैं; जैसे -

रक्त = र + क्त

वक्त = व + क्त

दिन = दि + न

इनमें र + क्त, व + क्त, दि + न के टुकड़े करने पर कुछ अर्थ नहीं निकलता है, अत: ये शब्द निरर्थक हैं।

परिभाषा-

ऐसे शब्द जो किसी विशेष अर्थ में प्रयुक्त होते हैं परंतु उनके टुकड़ों का कोई अर्थ नहीं निकलता, उन्हें रुढ़ शब्द कहा जाता है।

• यौगिक:- जो शब्द कई सार्थक शब्दों के मिलने (योग) से बने हो, वे यौगिक कहलाते हैं; जैसे -

(1) देवालय = देव + आलय = देवता का घर

(2) पुस्तकालय = पुस्तक + आलय = पुस्तक का घर

ये दोनों शब्द दो सार्थक शब्दों के मेल से बने हैं और इन दोनों शब्दों के अपने विशेष अर्थ भी हैं।

• योगरुढ़ शब्द:- (योगरुढ़ शब्द का अर्थ = योग + रुढ़ अर्थात् जो शब्द यौगिक शब्द व रुढ़ शब्दों के समावेश (मिलने) से बना हो, योगरूढ़ शब्द कहलाते हैं। इसमें यौगिक व रुढ़ दोनों शब्दों की विशेषताएँ होती हैं, अर्थात् यौगिक शब्दों की भाँति उनके सार्थक खंड किए जा सकते हैं तथा रुढ़ शब्दों के समान इनका एक विशेष प्रचलित अर्थ होता है; जैसे -

(1) गंगाधर = गंगा + धर = गंगा को धारण करने वाले अर्थात् शिव

(2) नीलकंठ = नील + कंठ = नीले कंठ वाले अर्थात् शिव

उपर्युक्त शब्द गंगाधर सिर्फ़ शिव के लिए प्रयुक्त होता है। उसी तरह नीलकंठ भी शिव के लिए प्रयुक्त होता है।

प्रयोग के आधार पर

जिस तरह से एक भवन निर्माण के लिए बहुत सारी सामग्री व लोगों की सहायता पड़ती है; जैसे - लोहा, ईंट, गारा, रेती, सीमेंट, इंजीनियर, मज़दूर इत्यादि। उसी प्रकार एक वाक्य का निर्माण अनेकों शब्दों के प्रयोग से होता है। इस वाक्य में प्रयोग लाए गए हर शब्द का अपना अलग-अलग महत्व होता है व अपना अलग कार्य होता है। इसी प्रयोग के आधार पर शब्दों के आठ निम्नलिखित भेद माने गए हैं -

(1) संज्ञा

(2) सर्वनाम

(3) विशेषण

(4) क्रिया

(5) क्रिया-विशेषण

(6) संबंधबोधक

(7) समुच्चयबोधक

(8) विस्मयादिबोधक

विकार के आधार पर

हिंदी भाषा में विकार के आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं -

1. विकारी शब्द :- विकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनका रुप परिवर्तित होता रहता है। ये परिवर्तन तीन कारणों से होता है - लिंग, वचन और कारक।

2. अविकारी शब्द :- अविकारी शब्दों में कोई परिवर्तन नहीं होता। उनका रुप हमेशा एक जैसा रहता है; जैसे -

1. राधा बहुत सुंदर चित्र बनाती है।

2. रोहन बहुत सुंदर चित्र बनाता है।

3. दोनों बहुत सुंदर चित्र बनाते हैं।

यहाँ 'बहुत सुंदर' शब्द क्रिया विशेषण है जिनमें लिंग के बदलने के बाद भी कोई परिवर्तन नहीं आया है, अत: ये अविकारी शब्द हैं।

इस चार्ट के द्वारा विकार के आधार पर इसके सभी भेदों को समझा जा सकता है।

अर्थ के आधार पर


अर्थ की दृष्टि से शब्द के दो भेद होते हैं -

(1) सार्थक :- जिन शब्दों का कुछ न कुछ अर्थ हो, वे शब्द सार्थक शब्द कहलाते हैं; जैसे - रोटी, पानी आदि।

(2) निरर्थक :- जिन शब्दों का कोई अर्थ नहीं होता है, वे निरर्थक शब्द कहलाते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप से कोई कार्यालय में मिलने व अपने काम के विषय में मिलने आता है और आपसे पूछता है। आपका हाल-वाल कैसा है, मेरा काम-वाम हुआ कि नहीं?

तो उस व्यक्ति के द्वारा पूछे गए शब्दों में हाल-वाल व काम-वाम का प्रयोग हुआ है। यहाँ हाल (तबीयत आदि से है) का अर्थ स्पष्ट है तथा काम (कार्य) का अर्थ स्पष्ट है परन्तु वाल व वाम का कोई अर्थ नहीं है, ऐसे शब्द निरर्थक शब्द होते हैं।

• सार्थक शब्दों का वर्गीकरण:-

एकार्थी शब्द - जिन शब्दों के अर्थ बदलते नहीं हैं, वे एकार्थी शब्द कहलाते हैं; जैसे - सूरज शब्द का एक ही अर्थ है − सूर्य।

उदाहरण -

1

अंजन

काजल

2

निपुण

चतुर

3

ऋण

कर्ज

4

नमक

लवण

5

यंत्रणा

दर्द

6

सप्तम

सातवाँ

7

सत्य

सच

8

नियति

भाग्य

9

कोकिल

कोयल

10

कपोत

कबूतर

11

डर

भय

12

अहंकार

घमंड

13

आरोग्य

रोग रहित

14

साक्षर

शिक्षित

15

घाव

ज़ख्म

अनेकार्थी शब्द - अनेकार्थी शब्द वे होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। इनके शब्द अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग अर्थ देते हैं; जैसे - तीर = (नदी का किनारा), बाण

उदाहरण -

अर्क

सूर्य, रस, पंडित, रविवार, आक का पौधा

ग्रहण

चाँद, सूर्य का ग्रहण, लेना

कुल

वंश, सब

घर

मकान, कुल, कार्यालय

जीवन

जल, प्राण, वायु

जलज

कमल, शंख, मोती, मछली

रक्त

लहू, केसर, ताँबा, कमल, सिंदूर

पत्र

चिट्ठी, पत्ता, शंख

कर्ण

कान, कुंती का पुत्र

चीर

वस्त्र, रेखा, चीरना (क्रिया)

आराम

बगीचा, विश्राम

तनु

पतला, सुंदर, कोमल

अनंत

आकाश, एक सुगंधित पदार्थ

अक्षर

वर्ण, शिव, ब्रह्मा, मोक्ष, सत्य, स्वर व्यंजन

  

सारंग

मोर, सर्प, हिरण, सिंह, हाथी, स्त्री

पर्यायवाची शब्द:-

जो अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं।

परन्तु यह याद रखना आवश्यक है कि अर्थ में समानता होने के कारण भी यह पर्यायवाची शब्द प्रयोग में एक दूसरे का स्थान नहीं ले सकते;

जैसे -

तुम्हारा निकेतन कहाँ है?

तुम्हारा घर कहाँ है?

'घर' का पर्यायवाची 'निकेतन' है। परन्तु घर के स्थान पर निकेतन का प्रयोग संभव नहीं है।

1

अनुपम

निराला, अनूठा, अपूर्व

2

गंगा

भागीरथी, गंगेय, अलकनंदा

3

प्रकाश

ज्योति, रोशनी, प्रभा

4

लक्ष्मी

रमा, इंदिरा, कमला

5

सौंदर्य

सुंदरता, सुषमा, शोभा

6

कामदेव

मदन, मनोज, अनंग

7

नौका

नाव, तरी, तरिणी

8

ब्राह्मण

विप्र, द्विज, भूदेव

9

सरस्वती

भारती, शारदा, वाणी

10

रावण

दशानन, लंकेश, दशकंठ

11

युद्ध

संग्राम, लड़ाई, संघर्ष

12

ब्रह्मा

विधाता, विधि, चतुरानन

13

बिजली

दामिनी, चपला, चंचला

14

दूध

क्षीर, दुग्ध, गोरस

15

कृष्ण

घनश्याम, गोपाल, श्याम

16

उपेक्षा

तिरस्कार, अवहेलना, अनादर

17

पृथ्वी

धरती, वसुधा, धरा

18

पत्ता

पत्र, पर्ण, पात

19

हिरन

मृग, सारंग, हरिण

20

शक्ति

बल, विक्रम, ताकत

विलोम शब्द:-

किसी शब्द से विपरीत अर्थ देने वाले शब्द, उसके विलोम शब्द कहलाते हैं; उदाहरण के लिए -

1

भाव

अभाव

2

यश

अपयश

3

छल

निश्छल

4

हर्ष

शोक

5

शांत

अशांत

6

संयोग

वियोग

7

साकार

निराकार

8

सक्षम

अक्षम

9

कायर

वीर

10

मोक्ष

बंधन

11

सजीव

निर्जीव

12

निंदा

स्तुति

13

धीर

अधीर

14

चल

अचल

15

गरीब

अमीर

16

सौभाग्य

दुर्भाग्य

17

मानव

दानव

18

पक्ष

विपक्ष

19

राजा

रंक

20

शांत

अशांत

भिन्नार्थक शब्द:-

कुछ शब्द उच्चारण (बोलने) की दृष्टि से समान प्रतीत होते हैं, परन्तु अर्थ की दृष्टि से उनमें भिन्नता होती है, उन्हें भिन्नार्थक शब्द कहा जाता है; जैसे -

1

चपल

चंचल

तुम बहुत चपल बुद्धि के हो।

 

चपला

बिजली

आसमान पर चपला चमक रही है।

2

आदि

प्रारंभ

आदिकाल में बहुत संत हुए।

 

आदी

शौकीन

वह खाने का आदी है।

3

कलि

कलियुग

कलि वेश बदल के आता है।

 

कली

फूल की कली

गुलाब की कली बहुत सुंदर है।

4

चर्म

चमड़ा

चर्मरोग से सफ़ाई द्वारा ही बचा जा सकता है।

 

चरम

अंतिम

युद्ध अपने चरम सीमा पर है।

5

प्रतिमा

मूर्ति

शिव की प्रतिमा अनुपम है।

 

प्रतिभा

बुद्धिमता

तुम्हारी प्रतिभा को नमस्कार करते हैं।

6

तरणि

सूर्य

आसमान में तरणि दमक रहा है।

 

तरणी

नौका

तरणी के द्वारा नदी पार की जाती है।

7

परिणाम

नतीजा

परीक्षा का परिणाम आज आएगा।

 

परिमाण

मात्रा

तुम दूध का परिमाण ज्ञात करो।

8

ज्ञान

जानकारी

तुम्हारे ज्ञान में बहुत वृद्धि हुई है।

 

ज्ञात

मालूम

तुम्हें ज्ञात हो, तो मैंने तुम्हें कुछ पैसे दिए थे।

9

रक्त

खून

रक्त बहुत बह रहा है।

 

रिक्त

खाली

रिक्त स्थान को भरो।

10

योग

मेल

यह बड़ा उत्तम योग है।

 

योग्य

अच्छा

यह योग्य लड़का है।

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द:-

हिंदी में अनेक शब्दों, वाक्यांशो या पदबंधो के लिए एक शब्द का प्रयोग किया जाता है। इससे लेखन में संक्षिप्तता आती है।

1

कोई काम-काज न करने वाला

अकर्मण्य

2

अपने आप पर बीती हुई

आपबीती

3

जिसकी गहराई का पता न मिल सके

अथाह

4

जिसके वास का किसी को पता न हो

अज्ञातवास

5

जिसका इलाज न हो सके

लाइलाज

6

जो कुछ जानता हो

अज्ञ

7

किसी वस्तु का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन करना

अतिश्योक्ति

8

बड़ा भाई

अग्रज

9

छोटा भाई

अनुज

10

जो सरलता से प्राप्त हो

सुलभ

11

मार्ग दिखाने वाला

पथप्रदर्शक

12

जिसकी लंबी आयु हो

दीर्घायु

13

बहुत तेज़ी से चलने वाला

द्रुतगामी

14

जो लोगों में प्रिय हो

लोकप्रिय

15

जो किसी पक्ष का न हो

निष्पक्ष

16

जो सबको समान दृष्टि से देखता हो

समदर्शी

17

उपदेशपरक वचन

प्रवचन

18

भावों में डूबा हुआ

भावविभोर

19

जिसका अंत दुख से भरा हो

दुखांत

20

जो कम बोलता हो

मितभाषी

अर्थ भेद वाले शब्द:-

कुछ शब्द हिंदी भाषा में पढ़ने में एक-दूसरे के पर्याय लगते हैं, परन्तु उनके अर्थों में अंतर विद्यमान होता है; जैसे -

1

अवस्था

अवस्था उम्र का ज्ञान कराती है।

 

आयु

आयु हमारे जीवनकाल का प्रतीक होती है।

2

श्रद्धा

अपने से बड़ों का आदर या भगवान के प्रति आदर, श्रद्धा कहलाता है।

 

भक्ति

अपने प्रियजनों, गुरुजनों व ईश्वर के प्रति प्रेम ही भक्ति है।

3

अपराध

कानून को तोड़ना अपराध कहलाता है।

 

पाप

सामाजिक दृष्टि से अनुचित कार्य पाप है।

4

अस्त्र

बारुद व परमाणु से निर्मित हथियार अस्त्र कहलाते हैं; जैसे - राकेट लाँचर, बंदूक, टैंक आदि।

 

शस्त्र

लोहे व धातु से बने हथियार शस्त्र कहलाते हैं; जैसे - तलवार, भाला, बरछी, धनुष आदि।

5

बहुमूल्य

जो मूल्य से अधिक हो बहुमूल्य।

 

अमूल्य

जिसका कोई मूल्य न हो अमूल्य।

1. अवधारणात्मक शब्द:-

इस शब्द का दूसरा नाम द्वित्व शब्द भी है, ये तीन प्रकार के होते हैं -

(i) पूर्ण पुनरुक्त :- जिन शब्दों की पहली इकाई दूसरी बार भी प्रयोग में लाई जाए, उसे पूर्ण पुनरुक्त शब्द कहते हैं -

1. बड़े - बड़े

2. रात - रात

3. कभी - कभी

4. चलते - चलते

5. सुबह - सुबह

6. खाते - खाते

7. राम - राम

8. छोटे - छोटे

9. कोई - कोई

(ii) अपूर्ण पुनरुक्त :- इन शब्दों में पहली इकाई से ही बना रुप होता है। परन्तु उसके जैसा नहीं होता, वेअपूर्ण पुनरुक्त शब्द कहलाते हैं -

1. भूख - भाख

2. लगा - लगाया

3. चलता - चल

4. टाल - मटोल

5. सीधा - साधा

6. ठीक - ठाक

7. रख - रखाव

8. बीचो - बीच

(ii) प्रतिध्वन्यात्मक पुनरुक्त :- इन शब्दों में पहली इकाई के शब्द की तरह ही ध्वनि देता है परन्तु उससे उसका कोई लेना देना नहीं होता, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द कहलाते हैं।

1. खाना - वाना

2. आना - शाना

3. काम - वाम

4. दूध - वूध

5. रोटी - सोटी

6. कल - वल

7. चाय - वाय

8. हँस - वस

9. बैठो - वैठो

10. आओ - शाओ

2. अनुकरणमूलक शब्द :- कुछ शब्द मिलती जुलती आवाज़ों के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं, ये शब्द ध्वनि पर आधारित होते हैं; जैसे -

1. छम - छम

2. पट - पट

3. चट - चट

4. खट - खट

5. खटाक

6. सनसनाहट

7. धप्प

8. छप-छप

9. धम्म

10. टख - टख

Comments

Popular posts from this blog

Army GD Model Paper 1 with Solutions by Garhwal Sir

1. पास्कल किसकी इकाई है दाब की  2. चलती हुई बस जब अचानक ब्रेक लgती है तो उसमें बैठे हुए यात्री आगे की दिशा में गिरते हैं किसको किसके द्वारा समझाया जा सकता है  न्यूटन का पहला नियम  3. दूध से क्रीम निकालने में कौन सा बल लगता है  उत्तर अपकेंद्रीय बल  4. ध्वनि की चाल अधिकतम किसमें होती है  उत्तर निर्वात में  5. दाढ़ी बनाने के लिए काम में लेते हैं  अवतल दर्पण  6. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की थी  उत्तर जे जे थॉमसन ने  7.भविष्य का ईंधन किसे कहा जाता है  उत्तर  हाइड्रोजन को  8.धोने का सोडा किस का प्रचलित नाम है  उत्तर सोडियम कार्बोनेट  9.सोडियम बाई कार्बोनेट का सामान्य नाम क्या है  उत्तर beकिंग सोडा  10. पोटेशियम नाइट्रेट का प्रयोग किसके उत्पादन में होता है  उत्तर Uravark के उत्पादन में  11.विश्व पर्यावरण दिवस किस दिन मनाया जाता है  उत्तर है 6 जून को  12. विटामिन ए को किस नाम से जाना जाता है  रेटिनोल  13.yeast ek क्या है  कवक है

Mahavir Chakra and Gallantry Award GD topic

Mahavir Chakra The Mahavir Chakra (MVC) is the  second-highest military decoration  in India and is awarded for acts of conspicuous gallantry in the presence of the enemy, whether on land, at sea or in the air. The Mahavir Chakra was instituted on 26 Jan 1950 to recognise the act of gallantry in the presence of the enemy. The most MVCs awarded in a single conflict were in the Indo-Pakistan War of 1971 when eleven awards are given to the Indian Air Force alone. Till 2017, there are around 218 personnel have been awarded from this medal. Gallantry Awards Gallantry Awards have been instituted by the Government of India to honour the acts of bravery and sacrifice of the officers/personnel of the Armed Forces, other lawfully constituted Forces and civilians. These gallantry awards are  announced twice in a year  – first on the occasion of the Republic Day and then on the occasion of the Independence Day. Types of Gallantry awards Gallantry Awards are classified into two C...